कोविड-19 की जागरूकता निबंध |
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| कोविड-19 की जागरूकता निबंध | |
कोविड-19 ने समस्त मनुष्य जाति को परभावित किया है और सोचने पर भी मजबूर कर
दिया है की इस वायरस से लड़ने के लिए हमको किस प्रकार तैयार रहना है | इतिहास साक्षी रहा है
की मनुष्य जाति ने हर समस्या का समाधान निकला है और निरंतर अपने को विकास के पथ
पर अग्रसर रखा है | कुछ क्षण आते है बीच में जो उसका सोचने और जगाने का काम करते है
की किस प्रकार और किस तरह इस नई समस्या का समाधान किया जाए |
मौजूदा समय में जो दौर है वो भी मनुष्य को अपने एवं स्वाथ्य के प्रति किस प्रकार जागरूक
रहा जाये जो की इस कोविड-19 कोरोना महामारी का सामना डरकर नहीं डटकर किया जा सके |
उसके लिए मनुष्य को अपने आहार एवं व्यवहार दोनों में परिवर्तन करना है| और निरंतर
परिस्थितियों से सीखकर उसमे जितना सुधर हो सके करने का प्रयास करना हैं क्योकि समस्या एवं
परिस्थिति से डरकर तो उसका समाधान होना कतई भी संभव नहीं है उसका सामना करके उसके
समाधान के लिए प्रयास करना ही मनुष्य की पहचान है ये कोविड-19 महामारी का दौर जब से
प्रारम्भ हुई है तब से ही मनुष्य ने सीखकर इससे लड़ने का प्रयास किया है सर्वप्रथम मनुष्य ने ये
जाना की इसका कोविड-19 महामारी का विस्तार किस प्रकार हो रहा |
- उसके लिए उसने सामाजिक दूरी (सोशल डिस्टन्सिंग) का पालन करना शुरू किया |
- निरंतर मास्क का उपयोग करने पर जोर दिया |
- हाथों को सेनेटाइज़ एवं साबुन से साफ करने पर भी ध्यान दिया |
- शुरुआत समय में देशों की सरकारों ने इस से निपटने सम्पूर्ण लॉकडाउन भी लगाया |
जो इसकी पहली लहर को नियंत्रित करने में कारगर सिद्ध हुआ इस महामारी से संक्रमित
होने की दर विभिन्न देशों में ज्यादातर लगभग 10 से 15 प्रतिशत रही है पहले लहर के समय विभिन्न
देशों में उसमे से 90 प्रतिशत लोग घर पर ही इलाज करके सही हुए है| लेकिन इसमें 5 से 8
प्रतिशत लोगों को जो सीरियस हुए है उनको अस्पतालों में भर्ती होना पड़ा | इनके लिए जो
व्यवस्थाएँ चाहिए होती है हॉस्पिटलों में वो अलग से व्यवस्थित करनी पड़ती ये पूर्ण विकसित
देशों के लिए भी चैलेंज रहा है तो विकासशील देशों भी अपनी क्षमताओं एवं सामार्थिया के
अनुसार अपनी स्वास्थ्य व्यवस्थाओं में सुधार करके कोविड-19 महामारी का सामना कर रहे हैं
इस समय जो स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का विस्तार भारत एवं अन्य देशों ने किया है इन स्वास्थ्य
सुविधाओं का उपयोग ज्यादा जनमानस को मिलेगा जो इस महामारी का सामना डटकर करने
में प्रभाव हथियार है
साथ - साथ वैज्ञानिकों ने भी कोविड-19 के वैक्सीन का फार्मूला भी इस बीमारी से लड़ने
के लिए तैयार कर लिया है | जिसमे भारत भी वैक्सीन विकसित करने में सबसे आगे रहा है जो
इस महामारी से लड़ने का एक अन्य महत्वपूर्ण हथियार मनुष्य ने अपनी सूझ बुझ के द्वारा विकसित
किया है | साथ - साथ इस कोरोना वायरस कोविड-19 ने भी अपने २० से ज्यादा स्वरुप बदल
लिए आज तक हर स्वरुप अपनी घातकता बढ़ा ही रहा है तो मनुष्य भी अभी तक उसका सामना
करके उस से पार पा रहा है इसमें बहुत लोगों की जाने भी जा रही है जो इसकी दूसरी लहर में
ज़्यादा देखा जा रहा है वो चिंता का विषय है
इसके साथ -साथ भारत ने टीकाकरण की गति भी तेजी से बढ़ाई हैं जहाँ दो भारतीय वैक्सीन
एक रूस की वैक्सीन फिलाल लहगाई जा रही है और अन्य कुछ और अप्प्रोवल्स फाइनल स्टेज में
हैं | भारत में टीकाकरण की प्रक्रिया की दर दुनिया में सबसे तेज एवं सबसे ज्यादा भी टीकाकरण
किया जाने का प्रयास किया जा रहा है देश के प्रधानमत्री जी का विजन है ज्यादा से ज्यादा लोगों
को टीकाकरण किया जा सके |
अब सरकारें ये समझ गई है पूर्ण लॉकडाउन लगाकर नहीं कुछ व्यवस्थाओं को बंद
करकर सामान्य एवं आम जरुरत की चीजें व्यवसाय एवं कारखानों को नियमों के पालन के साथ
चलाने का प्रयास सरकारों का हैं | अभी तक इस कोविड-19 महामारी का सामना करने
के लिए मनुष्य एवं व्यवस्थाओं ने 6 हाथियार खोजे हैं |
- सोशल डिस्टन्सिंग सामाजिक दुरी बनाये रखना |
- मास्क का उपयोग सदा करना हैं |
- हाथों को सेनेटीज़ या निरंतर अंतराल पैर साफ़ करते रहना हैं |
- पूर्ण लॉकडाउन एवं अर्ध लॉकडाउन की व्यवस्था बनाना |
- हॉस्पिटल ,अस्पतालों की व्यवस्थाओं को मजबूत करना जो ज्यादा से ज़्यादा लोगों अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएँ अधिक से अधिक मिल सके |
- वैक्सीन टीकाकरण का लाभ ज़्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुँचे जिस से महामारी से लड़ने प्रतिरोधक क्षमता लोगों में विकसित हो सके|

