कोविड-19 एवं प्राणायाम एवं योग |
- अनुलोम विलोम प्रणायाम |
अनुलोम विलोम को कुछ योग साधक नाड़ी शोधन प्राणायाम है अनुलोम का अर्थ सीधा एवं विलोम अर्थ उल्टा
होता है | जिस से तात्पर्य ये है की यदि बाएं नासिका के छिद्र से साँस लेनी है | फिर दायनी नासिका छिद्र से वायु
को बाहर छोड़ना है | फिर दायनी से से वायु लेनी है और बायी नासिका दे वायु को बाहर छोड़ना होता है | इस
प्रकार जाकर अनुलोम विलोम प्राणायाम चक्र पूरा होता है | नियमित अभ्यास से नाड़ियों का शोधन होता है जो
स्वस्थ एवं निरोगी बनता हैं |
- अनुलोम विलोम प्राणायाम करने की विधि |
सर्वप्रथम अपनी सुविधानुसार पद्मासन या सुखासन में बैठे जाए | दायिने हाथ के अंगूठे से नासिका के दायनी छिद्र
को बंद कीजिये | फिर नासिका के बाएं छिद्र से वायु ग्रहण करें | फिर अंगूठे के बग़ल वाली उंगली से बाएं
नासिका के छिद्र बंद करें एवं फिर दायनी नासिका के छिद्र से अँगूठा हटाकर वायु को बाहर छोड़े | इसी प्रकार
फिर दायनी नासिका के छिद्र से वायु को ग्रहण करे फिर दायनी नासिका को अँगूठे से बंद करें एवं बाई नासिका
के छिद्र से ऊँगली हटाकर वायु को बाहर छोड़े | ये इसके एक चक्र पुरा हुआ | इसी प्रकार इस क्रम को बनाए
रखना है और प्रतिदिन अपनी छमता के अनुसार धीरे-धीरे १० से १५ मिनट प्रतिदिन करना चाहिए | बायीं नाड़ी
को चंद्र नाड़ी दाई नाड़ी को सूर्य नाड़ी कहते है | चंद्र नाड़ी से ठंडी हवा अंदर जाती है | बायीं नाड़ी से गर्म हवा
अंदर जाती हैं | ठंडी और गर्म हवा के संतुलन से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती हैं |
- इस प्राणायाम खली पेट अभ्यास करना ज्यादा लाभदायक होता हैं |
- अनुलोम विलोम करते समय सावधानियाँ |
- अनुलोम विलोम प्राणायाम हमारे शरीर में शुद्ध ऑक्सीजन का परवाह ज़्यादा होता हैं |
- पाचन तंत्र को सुचरी रूप से चालान के लिए दुरुस्त करता हैं |
- शरीर के तापमान को संतुलित होता है |
- नाड़ी का शोधन होता से मन केंद्रित होता है एवं तनाव चिंता से मुक्ति मिलती हैं |
- फेफड़ो में ज्यादा से ज्यादा वायु प्रवाह होता हैं जिस से वो मजबूत होते और फेफड़ो से सम्बंधित रोगों से बचाओ करने में मददगार सिद्ध होता हैं |
- शरीर में अधिक वायु के संचार से ब्लड का भी निरंतर संचार होता हैं जिस से दिल सम्बंधित बीमारियों में रक्तचाप , कोलेस्ट्रॉल एवं केस में हार्ट ब्लॉकेज को भी खोलने में फायदेमंद साबित हुआ हैं |
- वायु का संतुलन होने से कफ सम्बंधित बीमारियां खाँसी , जुखाम नाक एवं गले रोगों में लाभ मिलता है |
- अनुलोम विलोम प्राणायाम नियमित अभ्यास एकाग्रत बढ़ाने में भी मददगार सिद्ध होता हैं |
- मधुमेह को भी नियंत्रित करने में लाभ मिलता हैं |
- मौजूदा दौर में तो ये तक सिद्ध हुआ है बहुत से रिसर्च में की इसका नियमित अभ्यास कैंसर ,किड़नी सम्बंधित , रोगों को नियंत्रित करने में फायदेमंद साबित हुआ हैं |
- वाध सम्बंधित विकारों गठिया बायु को भी नियंत्रित हैं |

