की क्योंकि किसी ने कभी कल्पना भी नहीं की थी |की इस प्रकार के स्तिथि भी आएंगे की सबकुछ बंद करना
पड़ेगा | क्योंकि अभी तक इस प्रकार की स्तिथि दंगे आदि में कर्फ्यू लगता था | जिसमें सबके बाहर निकलने में
पाबंदी होती थी | लेकिन पिछले एक साल में लोगों को सोशल सिक्योरिटी पर सोचने को मजबूर कर दिया है |
सबसे पहले डेली वेज रोजाना दिहाड़ी कार्य करने वाले लोगों पर पड़ा | क्योंकि जब सबकुछ बंद कर दिया
अपने घरों को पलायन किया क्योंकि जिनको पहले ही नहीं पता होता था | की कल कहाँ काम मिलेगा और जब
लॉकडाउन लग जाए तो फिर तो उनके लिए जीवन यापन करना कठिन हो जाता हैं | क्योंकि इस महंगाई के
समय में वो लोग कितनी मुश्किल से अपना घर शहरों में चला रहे हैं | ये जानते है | बहुत से लोग आप सबने
आर्थिक स्तिथि उनसे थोड़ी ज्यादा ठीक होती है | इनको कुछ दिनों तक तो दिक्कत नहीं होती हैं | लेकिन ज्यादा
प्रभावित या बंद की स्तिथि में इनके दिक्कत होती हैं | बहुत से दुकानदार तो अभी तक ढंगसे नहीं संभल पाए थे |
की दूसरी लहर आ गई | क्योकि इस समय प्रत्येक व्यक्ति की प्राथमिकता आम जरुरत के सामान को लेने में
ज्यादा हैं | न की लग्जूरी आइटम को लेने में इस समय जिसके पास दो पैसा आ भी रहा है वो भी बचत करने की
- मध्य एवं निम्न मध्य वर्ग नौकरीपेशा |
इस वर्ग के बाद कोविड-19 में सबसे ज़्यादा जो वर्ग प्रभावित हुए वो उन लोगों का था जो निम्न एवं मध्य वर्ग
के नौकरी पेशा लोगों की है | जिनको डेली ना मिलकर महीने में मिलती है पारिश्रमिक और जिनकी नौकरी सबसे
ज्यादा अनिश्चिता से भरी होती हैं | इनकी नौकरी तब ही चली जाती हैं जब किसी कंपनी कुछ डिमांड कम हो
जाये तो यदि पूरा प्लांट बंद हो जाये तो फिर इनपर प्रभाव पड़ना स्वाभाविक हैं | क्योकि जब कंपनी पूरा ही प्लांट
बंद करना पड़े तो आप समझ सकते हैं | की क्या स्तिथि होती है | क्योंकि इस वर्ग में लगभग 50 प्रतिशत से ज़्यादा
जनसँख्या कार्य इस वर्ग में ही कार्य करती हैं | इसलिए ये वर्ग ज़्यादा प्रभावित हुआ था | बहुत लोगों को तो अभी
तक नौकरी नहीं मिल पायी क्योंकि कंपनी बहुत सी प्रारम्भ हो गई है लेकिन प्रोडक्शन नहीं कर रही है उतना
और अभी दुबारा कब स्तिथि सामान्य होगी कुछ पता नहीं क्योकि अभी दूसरी लहर से पूरा भारत वर्ष प्रभावित हो
रखा हैं लेकिन इस समय कुछ ही राज्यों ने अपने यहाँ कारखानों बंद किया हुए हैं | जहाँ स्तिथि ज्यादा ख़राब या
प्रभावित हो रखी थी कोविड-19 के कारण | लेकिन कुछ राज्य जहाँ स्तिथि सामान्य थी वहाँ कारखानों को खोल
रखा था |
निजी स्कूलों एवं कॉलेज के टीचर एवं अन्य स्टाफ ये सब लोग भी बहुत ज्यादा प्रभावित हुए है क्योकि
स्कूल कॉलेज तो 1 साल से ज्यादा समय से बंद है | ऑनलाइन क्लासेस तो चल रही है सभी में | लेकिन स्कूलों
में स्कूल प्रबंधको ने स्टाफ आधे से कम कर दिया हैं | जिसमे सपोर्टिंग स्टाफ एवं बहुत से टीचर्स भी हैं |
जिनको स्कूलों ने बोला हैं अभी इतने स्टाफ की जरुरत नहीं हैं | और जो स्टाफ कार्यरत हैं | उनको भी आधी सैलरी
ही दे पा रहे हैं स्कूल प्रबंधन |
इस वर्ग में आर्थिक रूप से सम्पन लोग आते हैं | इनके सैलरी पैकेज एवं पोस्ट भी एग्जीक्यूटिव की या उस से
ऊपर के सीनियर वर्ग की होता हैं | लेकिन जब प्लांट या बिज़नेस ही शटडाऊन करना पडा पिछले साल
कंपनियों को तो ये लोग भी सोचने को मजबूर हो गए की ये भी हो सकता हैं | बहुत सी कंपनियों ने इनकी सैलरी
में 25 से 30 प्रतशित की कटौती की |
- मध्य एवं निम्न वर्ग के व्यवसाई
ये व्यवसाई वर्ग सबसे ज़्यादा प्रभावित हुआ हैं इस कोविड-19 के दौरान जो आज तक अपने कार्य दुबारा पटरी
पर नहीं ला पाए है | क्योकि परिस्थिति इस इस प्रकार की हैं कोविड-19 के कारण की पहले प्रथम लहर ने
प्रभावित किया तो अब दूसरी लहर ने कर रखा हैं | ये व्यवसाई वर्ग भारत की अर्थव्यवस्था को चलने में महत्वपूर्ण
योगदान देता हैं | एवं इनसे बहुत से लोगों की रोज़ी रोटी जुड़ी हुई होती हैं |
इसके अलावा शॉपिंग मॉल , सिनेमा हॉल , मल्टीप्लेक्स एयरलाइन्स से भी बहुत से लोगों की जीविका जुड़ी हुई
हैं | जो इस कोविड-19 के दौरान अभी तक प्रभावित हुई है क्योकि इसमें अधिक लोगों का आना जाना होता हैं |
जो संक्रमण के प्रसार का मुख्य कारण माना जाता हैं |
कोविड-19 के दौरान नौकरी में परिवर्तन और सीखने की बातें |
कोविड-19 के दौरान जहाँ एक तरफ बहुत से सेक्टरों में लोगों की नौकरियाँ गई हैं इसी दौरान बहुत से सेक्टर्स में
बहुत जबरदस्त ग्रोथ हुई है इस कोविड-19 के दौरान जिसमें आईटी सम्बंधित जॉब्स एवं बिज़नेस ने बहुत ज़्यादा
कुछ ने अप्रत्यशित प्रगति की हैं | इस दौरान घर से कार्य करने का चलन बहुत ज़्यादा बढ़ा हैं | जिसके कारण
लोगों ने इस समय घर के कार्यों में मदद की एवं अपने कंपनी का कार्य भी किया | और बहुत से लोगों ने इस समय
को अवसर बनाकर नई स्किल लर्निंग किये | जिसका लाभ उनको उनकी नौकरी में भविष्य में मिलेगा |
जिन सेक्टर्स ने सबसे ज़्यादा ग्रोथ देखी गई इस दौरान वो सेक्टर सूचना प्रौद्योगिकी , फार्मा सेक्टर , मोबाइल
एप्लीकेशन, केमिकल मैन्युफैक्चरिंग , शेयर मार्किट आदि प्रमुख हैं |
- सूचना प्रौद्योगिकी , मोबाइल एप्लीकेशन में कोविड-19 के दौरान नौकरियों बृद्धि देखी गई |
आई टी सेक्टर्स की ग्रोथ का ग्राफ अप्रत्यशित हैं | पिछले साल जब लॉकडाउन प्रारम्भ हुआ | दुनिया के सभी
देशों में ज़्यादातर मीटिंग ऑनलाइन होने लगी जिसमें ज़ूम एप्लीकेशन , गूगल मीट एवं अन्य एप्लीकेशन की
डाउनलोडिंग एवं उपयोग ज़्यादा हुआ | इस से इन कम्पनीज की आय में भी अप्रतियासित बढ़ावा हुआ | ज़ूम एप्प
का ही अप्रैल तिमाही के नतीजों में ही उस समय 4 गुना से अधिक बढ़ोतरी हुई थी | एवं ये ग्रोथ अभी तक जारी है
इसलिए इन कंपनियों ने बहुत भर्तियां करी इस दौरान क्योकि इनकी बिज़नेस में ग्रोथ हो रही थी.
जब पिछले वर्ष दुनिया एवं भारत में लॉकडाउन स्टार्ट हुआ तो सभी को घर पर ही रहना पड़ा तो उस
समय मोबाइल एप्लीकेशन , यूट्यूब , ओ टी टी प्लेटफॉर्म ( अमेज़न , नेटफ्लिक्स ) आदि एप्लीकेशन्स बहुत
ज़्यादा तादाद में उपयोग की गई थी | अमेज़न वीडियो के सब्सक्राइबर्स में ही अप्रतियासित बृद्धि हुई जिसका
परिणाम ये हुआ अमेज़न में जहाँ लॉकडाऊन से पहले 8 लाख के लगभग लोग काम करते थे वो अब 13 लाख हैं
| इसी प्रकार गेमिंग ऍप्लिकेशन्स भी बहुत इन्सटाल्ड हुई एवं नई डेवेलप भी हुई जिसके बहुत से आई टी से
सम्बंदित प्रोफेशनल्स को एम्प्लॉयमेंट मिला |
- फार्मा सेक्टर में कोविड-19 के दौरान ग्रोथ देखी गई जिस से नौकरियों बृद्धि हुई |
जब दुनिया एवं भारत में महामारी का दौर चल रहा हो तो इस समय स्वास्थ्य सविधाओं , दवाइयों , हेल्थ
सुप्प्लिमेंट्स , आयुर्वेदिक इम्युनिटी बूस्टर्स की डिमांड में बहुत इजाफा हुआ | पुरे देश में सब व्यवस्थाऍ बंद की
गई थी |लेकिन फार्म मैन्युफैक्चरिंग प्लांट , ऍफ़ एम् सी जी के प्लांट बंद नहीं किये गए | जहाँ साबुन , सेनेटीज़र की
डिमांड बड़ी तो केमिकल सेक्टर में भी ग्रोथ हुई जिसमें रोजगार में भी बढ़ोतरी हुई होगी इस सेक्टर में | जहाँ
पैरासिटामोल जैसी सबसे कॉमन मेडिसिन के मूल्य में भी 60 से 70 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है |
- शेयर बाज़ार में भी ग्रोथ देखी गई जिस से बहुत लोगों को रोज़गार मिला |
जब सब कुछ बंद था तो शेयर बाज़ार खुला था | जो लोग समझ रखते हैं बाज़ार की उन्होंने तो निवेश किया ही
एवं जिनके पास पैसा था | उन्होंने भी इस लॉकडाऊन के समय में बाजार से कमाई की इसका प्रमाण इस बात से
मिलता हैं | स्टॉक मार्किट में ट्रेडिंग के लिए आपको डीमैट अकाउंट ओपन करवाने पड़ते हैं | जहाँ लॉकडाउन से
पहले के सालों में साल में 20 से 25 लाख ही डीमैट अकाउंट लगभग प्रत्येक वर्ष में खुलते थे | इस पिछले वित् वर्ष
में वो अकड़े 1 . 41 करोड़ डीमैट अकाउंट ओपन किये गए | बहुत से सर्विस प्रोवाइडर की ऍप्लिकेशन्स जो
डीमैट अकाउंट ओपन करने की सुविधा देते है | उनके ग्राहकों की संख्या एवं डाउनलोड्स में बहुत ग्रोथ देखी
गई कुछ नये सर्विस प्रोवाइडरों ने भी बहुत ग्रोथ की इस समय |
जहाँ भारत सरकार एवं राज्य सरकारों ने भी अपने क्षेत्रों की जनता जो अलग-अलग राज्यों में थे | उनको वापस
बुलाने में मदद करी साथ - साथ राज्य सरकारों ने केंद्र की मदद से इस समय रासन भी बढ़कर दिया जो कुछ
मदद हो सके इस संकट के समय में इसी दौरान बहुत से लोग एवम सामाजिक संस्थाओं के द्वारा जो सहायता
भोजन वितरण से लेकर एवं अन्य हॉस्पिटल पूछना आदि वो एक मिसाल रहेगी आने वाली जनरेशन के लिए एवं
बहुत सी संस्थाओं ने वो सेवा कार्य आज जब दूसरी लहर का प्रकोप चल रहा हैं | अपना योगदान बढ़ाया ही हैं कम
नहीं किया हैं | साथ - साथ केंद्र के सहयोग से राज्य सरकारों के द्वारा स्वाथ्य सुविधाओं को बढ़ाने में अपनी
छमता के अनुसार प्रयास किये जा रहे हैं | एवं टीकाकरण में भी निरंतर बढ़ोतरी की जा रही है जिस से ज़्यादा से
ज़्यादा लोगों तक इसका लाभ पहुंचे |
आशा हैं इस कोविड-19 महामारी से समस्त विश्व को जल्दी ही निजात मिलेगी | लेकिन जब तक हैं तब तक
जागरूकता एवं नियमों के पालन से इस महामारी से लड़ने का प्रयास किया जा रहा हैं सबके द्वारा |